Saturday, May 8, 2010

एक मां के लिये

वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज कुमार (भैया ) ने एक कविता लिखी और मुझे मेल कर दिया , मुझे अच्छी लगी तो मैंने उसे पूरी दुनिया को पढवा दिया, मैं ऐसा ही हूँ ................

बड़ी भली है अम्मा मेरी ताजा दूध पिलाती है
कभी सांची तो कभी अमूल का पैकेट लेकर आती है
रोज रोज बढ़ते दूध की कीमत भी अम्मां को नहीं डरा पाती है
लल्ला को दूध पिलाने खुद भूखी रह जाती है
बड़ी भली है अम्मा मेरी ताजा दूध पिलाती है

अम्मां खुद तो कुछ भी नही थी बस चिंता थी उसके पास
लल्ला बने गबरू जवान उसके मन में यही थी आस
घडी बदली, घंटा बदला बदला जीवन का रेला
बैठ रेल में लल्ला शहर को चल पड़ा अकेला

अम्मा रह गयी अकेली लल्ला की यादों में
ताक रही है राह अभी, आँख टिका दरवाजे में
लल्ला आकर मुझे कहेगा लेकर अपनी बांहों में
बड़ी भली है अम्मा मेरी ताजा दूध पिलाती है
मनोज कुमार
प्रतिक्रियाएं सीधे उन्हें भी दे सकते हैं उनका ईमेल - k.manojnews@gmail.com

2 comments:

राजेन्द्र मीणा said...

बहुत अच्छी रचना लिखी गयी है .......माँ पर कुछ भी लिखे कम ही लगता है .....बहुत बढ़िया प्रस्तुति ./...........'माँ ' शब्द पर हमने भी कुछ लिखने की कोशिश की है ...आपके सुझाव सादर आमंत्रित है

http://athaah.blogspot.com/

दिलीप said...

bahut sundar aur marmik